Thursday, December 18, 2008

बचपन के वो दिन....

ना जाने कब हम बड़े हो गए,
बचपन के वो दिन पीछे रह गए,
जब हम भी स्कूल जाया करते,
दोस्तों से रूठा मनाया करते,
उस वक्त भी हम अपने आप को बड़े समझते,
और किताबों के वजन को,
कन्धों पे ढोया करते,
ना जाने कब हम...
बचपन के वो दिन...

याद आता है वो क्लास-रूम,
जहाँ हम बैठा करते,
Science से कब्बडी,
और Maths से डरा करते,
Hindi की वो पकाऊ कहानियाँ,
और English के Poems से भागा करते,
Geography में Countries के नाम,
कभी याद किए नही,
और History की Period में सो जाया करते,
फिर भी पढ़ाई में ख़ुद को Genius समझते,
Examination Period में खूब पढा करते,
फिर भी नंबर के लिए,
रोया करते,
ना जाने कब हम बड़े...
बचपन के वो दिन...

पहली हीं Period में,
दोस्तों से लड़ जाया करते,
और पुरे दिन एक-दुसरे से,
बातें नही किया करते,
और आखरी Period में,
एक दुसरे को Sorry कहने के लिए,
फिर से लड़ा करते,
ना जाने कब हम...
बचपन के वो दिन...

Prayer Time में हम गायब रहते,
और Assembly-Hall में भी,
शैतानियाँ किया करते,
हर Period के अंत में Class-room से,
निकल जाया करते,
और Class Monitor पे भी,
अपनी धौस जमाया करते,
ना जाने कब हम...
बचपन के वो दिन...

जिस दिन हम Absent हो जाते,
Teacher भी खुश होते,
उन्हें भी पढ़ने का मौका मिलता,
दुसरे बच्चो को सिखाने का मौका मिलता,
हमारी शैतानियों पर,
Teacher भी मुस्कुराते,
और दिखावटी गुस्से में,
हमारी पिटाई भी लगते,
ना जाने कब हम बड़े हो गए...
बचपन के वो दिन पीछे रह गए...


----------Neeraj Sharma----------

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