
जब चूम के तेरे माथे को,
मेरी नज़रो में जो तेरी इज्ज़त है,
उसे मैंने बताया था,
और......
तेरे दिल में जो,
मेरे लिए प्यार है,
हौले से मेरे गालों पर,
अपनी दांतों से काट कर,
मुझे जताया था,
उस लम्हे को,
कैसे मैं अपनी जिंदगी में,
सम्भाल रखूं,
उस दो पल के,
प्यार के बदले,
तुझे क्या दूँ,
ये तू ही मुझे बता दे........
सोचता हूँ,
उस छोटी सी मुलाकात को,
जब हम यूँ ही,
अचानक मिल गए,
कुछ खास तो था वो लम्हा,
जब हम दोस्त बन गये,
कभी सोचा न था,
यूँ हम साथ-साथ चलेंगे,
एक-दुसरे को हम यूँ,
याद किया करेंगे,
इन यादों को कैसे,
मैं संभालूं,
इनके बदले,
तुझे क्या दूँ,
ये तू ही मुझे बता दे.........
जिस प्यार के एक कतरे के लिए,
कभी दुआ मांगी थी,
मैंने अपनी बंद लबों से,
शायद उसने सुन लिया होगा,
और मुझे प्यार कि बारिश में,
भिगों देने के लिए,
भेज दिया तुम्हे,
मेरी ज़िन्दगी में,
कैसे संभालूं इसे,
खुदा कि इस इनायत के बदले,
तुझे क्या दूँ,
ये तू ही बता दे मुझे..........
कल कि जिंदगी का भरोसा नही,
ना जाने हम-तुम कहाँ होंगे,
आंखों में थोडी नमी,
पर लबों पे मुस्कान लिए,
उस दो लम्हे कि,
यादों कि छाओं में,
सोते रहेंगे,
जब भी हम तनहा होंगे.....
इन दो लम्हों के बदले,
तुझे क्या दूँ,
ये तू ही बता दे मुझे.............
Neeraj Sharma
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