Saturday, January 17, 2009

सच....



ज़िन्दगी अभी रुकी नही,
साँस अभी थमी नही,
तुम अभी जीते नही,
मैं अभी हारा नही,
माना कुछ अनकही बातों की,
कहानी बनती गई,
हम तो ठहरे रहे,
पर दूरियां बढती रही,
लेकिन सच है एक बात,
तुम ग़लत नही,
और मेरी गलती नही,
सच है मैं तुम सा नही,
थोड़ा बचपना है मुझमे,
मैं तुम सा समझदार नही,
पर कोई तुमसा नही हो सकता,
इस बात से भी,
मैं अनजान नही,
बात ये नही कैसे मैं जाने दूँ,
सच तो ये है की क्यूँ तुम्हे जाने दूँ?

मुझे और तुम्हे ही क्या,

इस रिश्ते को तोड़ देने का,

हक तो उपरवाले को भी नही....

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